Birbal Ki Sikh Motivational Story In Hindi. बीरबल की सीख

अकबर बहुत बडे सम्राट थे और बीरबल उनके नवरत्न मंत्रियोँ मेँ से सबसे मुख्य मंत्री थे। बीरबल बहुत ही बुद्धिमान थे और अकबर के सबसे प्रिय मंत्री माने जाते थे। 

अकबर हमेशा बीरबल से कुछ न कुछ सीखे रहते थे , और बीरबल को हमेशा अपने साथ रखते थे। 
अकबर और बीरबल अक्सर अपना भेष बदल कर शहर मेँ प्रजा के बीच जाया करते थे ताकि उनके राज्य मे क्या चल रहा है यह पता चलता रहे। 


एक बार अकबर और बीरबल शहर के बाजार में भेष  बदल कर साथ साथ घूम रहे थे। जाते हुए कई सारे लोगोँ रास्ते मेँ मिले , सभी लोग बीरबल की तरफ देखते तो मुस्कुराते जबकि अकबर को देखकर कोई नहीँ मुस्कराता जबकि दोनो ने अपना भेष  बदला हुआ था अकबर ने सोचा कुछ तो दाल मेँ काला है। अकबर ने बीरबल से पूछा – ” बीरबल क्या यह लोग  तुम्हे  पहचानते है। ” बीरबल ने कहा – ” नहीँ महराज न यह लोग  मुझे जानते है न ही आपको जानते है। ” दोनो आगे बढ़ गए लेकिन फिर भी जो लोग बीरबल की तरफ देखते हुए मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते जबकि अकबर को देखकर कोई नहीँ मुस्कुराता अकबर से रहा नहीँ गया।  उसने बीरबल से पूछ ही लिया – ” अगर यह लोग तुम्हे नही जानते तो तुम्हे  देख कर  मुस्कुरा क्यूँ रहे है ?  जबकि मुझे देख कर तो कोई नहीँ मुस्कुरा रहा। ” बीरबल बोला – ” महाराज जब कोई मेरी तरफ देखता हे तो मैँ मुस्कुराता हूँ उसको देख सामने वाला भी वैसे ही मुस्कुराता है जबकि  आपकी ओर जो भी देखता है , वह आपको गंभीर देखता है और वह भी गंभीर हो जाता है क्यूंकि हम जैसा देंगे वैसा ही तो हमेँ मिलेगा। यह सुनकर अकबर को सब समझ आ गया और वह भी सभी की ओर मुस्कुराकर चलने लगा और सामने से भी उनहे मुस्कुराहट ही मिली। 
इस दुनिया मेँ हमे वही मिलता है जो हम दुनिया को देते है। हर आदमी दूसरोँ से सबकुछ अच्छा चाहता है पर वह खुद वैसा बनना नहीँ चाहता।  सभी चाहते है कि सडके साफ हो पर अपना कचरा घर के बाहर ही डालते है।  देश भ्रष्टाचार मुक्त हो पर मोका मिले तो खुद थोडा बहुत इधर – उधर कर लेते है। 
 मेरे एक अंकल है जिन्हे सिगरेट पीने की आदत है , अक्सर वह अपने बेटे को दुकान से सिगरेट लेने भेजते है उनका बेटा 13  साल का है एक दिन अंकल ने अपने बेटे को सिगरेट पीते हुए देखा और खूब पिटाई की। यह क्या बच्चे की गलती थी ? बच्चे वही सीखते है जो हम करते है। मै काफी समय direct sale के profession में भी रहा हूँ जब हम सेल के लिए किसी के घर जाते थे तो अक्सर बच्चो के मम्मी पापा अंदर से हमेँ देख कर बच्चो से कहते थे जाओ कहदो घर मेँ कोई नहीँ है। कई बार हम सुन लेते थे और कई बार भोले भाले बच्चे खुद आकर बताते थे कि मम्मी या पापा ने बोला है कि घर मेँ कोई नहीँ है  हम मुस्कुराते हुए कोई बात नहीँ कहते हुए आगे बढ़ जाते थे। हमारे बच्चे झूठ ना बोलेँ ईमानदार रहे पर हम ख़ुद उन्हें कई बार झूठ बोलना और बेईमानी करना सिखा रहे होते है। सबसे पहले अपने आप को बदलना होगा दुनिया अपने आप बदल जाएगी। 
महात्मा गांधी ने कहा है ” Be the change that you wish to see in the world . “

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