Ek Nai Subhah Story In Hindi. एक नई सुबह

Ek nai subah hindi story

मनोज और नीतू के दो बच्चे है, बड़ी कोमल और छोटा अनुज , दोनो बच्चो के लालन – पालन के अलावा उनके पास एक और जिम्मेदारी है वो है मनोज की बुढ़ी मॉ। सत्तर वर्षीय मनोज की मॉ बहुत कम बात करती है लेकिन जब बात करती तो  लोगो के मन में एक नयी सीख दे जाती, इसलिए सब उनसे बहुत प्यार करते थे। मनोज ऑटो चलाते है
और घर पर एक छोटी सी किराना दुकान खोल रखे है, जिसे नीतू सम्हालती है। मनोज सबका खुब ख्याल रखते, किसको, कब, क्या जरूरत है, सबका ध्यान मनोज को होता था। कोमल ने इसी साल पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली और अनुज नाइन्थ क्लास में एडमीशन लिया। दोनो की परवरिश मनोज और नीतू ने बहुत अच्छे से की और दादी ने हमेशा स्वाभिमान का पाठ पढ़ाया।

 एक दिन अचानक रोड एक्सिडेंट में मनोज और नीतू की मौत गई, फिर क्या पुरा परिवार बिखर गया। मनोज ने सबसे अच्छे संबंध बना रखे थे, सो उसके परिवार वालो को उसके जाने के बाद पुर्ण सहयोग मिला, सब रिस्तेदार जाते वक्त कोमल से कहा कि कोई भी मदद हो तो बेहिचक कहना, कोमल ने भी ऑखो में ऑसु लिए हॉ में सिर हिला दिया। अब सारी जिम्मेदारी कोमल पर आ गई।
 दादी ने कोमल को एक सीख दी जिसे उसने गांठ बांध ली उन्होने कहा ” बेटा हमदर्दी दिखाकर  या तरस खाकर तो लोग कुछ समय के लिए हमारी मदद जरूर कर देंगे, लेकिन जिंदगी भर के लिए नहीं, इससे हमारा स्वाभिमान को ठेस पहुँचेगा और जब तक हमारा शरीर सलामत है,  दिमाग चल रहा है, तो ये सब क्यो करे, जैसे हर रात के बाद सुबह होती है और सुबह सूर्य की किरण एक नई उमंग लेकर आती है, बस हमे अपने हिम्मत, उमंग व दिलो दिमाग को कमजोर नही होने देना है, ऊपर वाले के शिवा किसी के सामने नतमस्तक नही होना है। “
 ये बात कोमल के मन में घर कर गई, वो सोंच ली कि अपने मॉ की दुकान सुचारू रूप से चलाएगी, अनुज की पढ़ाइ पुरी करवाएगी। पढ़ाई में अच्छे होने के कारण कोमल को नौकरी तो मिल गई लेकिन कुछ ही महीनो में उसके बॉस ने उसके साथ गलत व्यवहार करना शुरू कर दिया , जैसे कोमल को लास्ट में छुट्टी देना, जबरदस्ती टकरा जाना, बहाने करके एकदम करीब आ जाना, अपने असुरक्षा के डर से कोमल ने नौकरी छोड़ने में ही अपना भलाई समझीं। कोमल जब भी परेशान होती तो दादी से पुछती उसे क्या करना चाहिए तब दादी किसी कहानी के जरिए उसका हिम्मत बंधाती। दुनियॉ से बेफिजुल हमदर्दी व अपने असुरक्षा की भावना से तंग आकर जीनत सोंच ली कि वो खुद का काम करेगी, इसके चलते वो अपने पापा के ऑटो बेच दी, जिससे दुकान को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इसी बीच अनुज का रिजल्ट आ गया, उसके अच्छे नंबंर से खुश होकर कोमल उसे लेकर इलेक्ट्रॉनिक शॉप गई व उसके लिए म्युजिक सिस्टम लिया। अनुज ने कहा दीदी इसकी क्या जरूरत तो कोमल सर पे हाथ फेरते हुए बोली अगर पापा होते तो तु मांग करता न, और पापा नही है तो क्या हुआ मै तो हु ना।
एक दिन किसी रिस्तेदार ने कोमल के लिए रिस्ता बताया , पहले तो ना नुकुर की फिर दादी ने समझाया कि एक बार मिलने में क्या बुराई है तो वो मान गई, अपने से छह साल बड़े आलोक  सरकारी क्लर्क है, दिखने में भी ठीक है। आलोक ने जब पहली बार कोमल को देखा तो बस कोमल उसके दिल पे बस गई और उसी समय मन में फैसला कर लिया कि शादी इसी से करनी है, आलोक ने अपने दिल को सम्हालते हुए बात आगे बढ़ाई, अपने बारे में बताया, उसके पापा बचपन में ही गुजर गए व परिवार के नाम में उसकी अम्मी ही है। कोमल ने साफ शब्दों में कह दिया कि वो शादी के बाद भी अनुज व दादी को नही छोड़ सकती, कोमल को आलोक से अजीब – सी उलझन होने लगी थी, उसे लगने लगा था जैसे आलोक के रूप में किसी ने मन भर का बोझ उस पर लाद दिया हो, जिसे उसे ताउम्र ढोना है, तब आलोक ने हँसकर कहा कि मेरे अपने को तुम अपना लेना व तुम्हारे को में। दोनो की शादी रीति – रिवाजो से सम्पन्न हुई। अब परिवार में कुल पॉच लोग है, सबके साथ पाकर हर इंसान खुश है, अनुज की पढ़ाई अच्छे से चल रही है, कोमल घर में दुकान देखती है. सास , दादी का खुब ख्याल रखती है।
आज पहली बार कोमल को गुनगनाते सुना, उसकी गीत की स्वर लहरिया रह – रह कर घर भर के सदस्यों के कानो में एक नई भोर के उदय का संकेत दे रही है।
   लेखक    
   Maneesha Madaria
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