Makdi Ka Adhura Jaala Motivational Story In Hindi. मकड़ी का अधूरा जाला

एक बार एक मकड़ी एक नए घर मे आती है। घर काफी बड़ा और साफ सुथरा था।मकड़ी भूखी थी वह रहने और शिकार करने के लिए एक जाला बनाने के बारे मे सोचती है। वह कमरे मे एक कोने मे जाला बनाने के बारे मे सोचती है और अपना जाला बनाना शुरु करती है।
जब वह अपना जाला बना रही होती है तभी उसकी नजर नीचे खड़ी हुई एक बिल्ली पर पड़ती है , बिल्ली उसे जाला बनाते हुए देख रही थी।मकड़ी अपना काम चालू रखती है फिर भी बिल्ली उसी को देख रही होती है।

मकड़ी के मन मे सवाल आता है और वह दिल्ली से पूछती है – ” क्या हुआ बिल्ली मौसी,ऐसे क्यो देख रही हो।”
बिल्ली बोलती है – ” मै सोच रही हूँ कि तुम इस कोने मे तुम्हारा जाला बना रही हो। यह कमरा अक्सर बंद रहता है। यहाँ तुम्हे तुम्हारा शिकार नहीँ मिलेगा। इसकी जगह किसी खुली जगह मे जाला बनाओ।”

मकड़ी सोचती है बिल्ली सही बोल रही है और घर भी नया बना है। अब बिल्ली दूसरी जगह ढूंढती है और एक खिड़की चुनती है क्योकि खिड़की से आते जाते मक्खियाँ मच्छर उसके जाले में फसेंगे और वह उनका शिकार कर पाएगी यह सोच कर वह अपना जाला बनाना शुरु करती है। वहा वह अपना जाला बना रही होती है भूख भी तेज लग रही होती है। वह अपना आधा जाला बना चुकी होती है , तभी उसकी नजर बाहर पेड़ पर बैठी चिड़िया पर पड़ती है। चिड़िया मकड़ी को देख कर हंस रही होती है। मकड़ी देखती है और पूछती है – ” क्या हुआ चिड़िया रानी तुम हंस क्यो रही हो ? “
चिड़ियाँ बोलती है – ” मै तुम्हारी मूर्खता पर हंस रही हूँ। तुम खिड़की मे जाला बना रही हो , बाहर जंगल का इलाका है यहाँ तेज हवा चलती है तेज हवा के झोंके में तुम्हारे जाले के साथ-साथ तुम भी उड़ जाओगी तुम्हारी पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी।”
मकड़ी को चिड़िया की बात मे सच्चाई नजर आती है वह जाला बनाना छोड़ कर नई जगह ढूंढती है। अब उसे एक अलमारी दिखाई देती है। मकड़ी अलमीरा मे अपना जाला बनाना शुरु करती है जैसे ही उसका आधा जाला बनता है उसे आवाज सुनाई देती है पर वह उस पर ध्यान नहीँ देती क्योंकि वह काफी समय से भूखी थी और कमजोर भी हो गई थी उसे फिर आवाज सुनाई देती है। वह देखती है कि वहाँ एक कॉकरोच था कॉकरोच कहता है – ” यह क्या कर रही हो मकड़ी बहन ? यहाँ जाला बना रही हो ! यह अलमारी हमेशा बंद पड़ी रहती है, पुरानी हो गई है। और मैने घर के लोगो को बात करते सुना है कि जल्द ही यह लोग इस लकड़ी की अलमारी को रद्दी वाले को बेच देंगे इसलिए मै भी इसे छोड़कर जा रहा हूँ। मैँ यहाँ कई दिनो से रह रहा था।
मकड़ी को उसकी बात सही और तर्क पूर्ण लगती है।वह एक बार फिर जाला बनाना छोड़ कर नई जगह तलाश करती है और जगह ढूंढते-ढूंढते भूख और कमजोरी की वजह से गिर जाती है।
तभी उसके पास से एक चींटी गुजरती है।मकड़ी चींटी से मदद के लिए बोलती है और कहती है – ” बहन मेरी मदद करो। मै कई दिनो से भूखी हूँ और मेरे पास कोई जाला भी नही है। मैँ मर जाऊंगी, मेरी मदद करो।”
चींटी कहती है – ” मैँ तुम्हारी मदद कैसे करुँ!तुम तो हमेशा ही दूसरो की बातो मेँ आ जाती हो। मै तुम्हे काफी समय से देख रही हूँ , पहले तुमने बिल्ली की बातो मे आकर अपना जाला बनाना छोड़ा। फिर चिड़िया की बात मानकर और अब कॉकरोच की बात सुनकर तुमने तुम्हारा काम छोड़ दिया।
इन तीनो जगह मे से किसी एक जगह भी अगर तुम अपना जाला बनाती तो तुम्हारे पास रहने के लिए घर और शिकार के लिए जाला होता और आज तुम मरने की स्थिति मे नहीँ होती।
यह कहकर चीटी वहाँ से चली जाती है।
मकड़ी सोचती है काश मे किसी की बातो मे नही आती तो आज मैँ इस स्थिति मेँ नहीँ होती।
और मकड़ी वही पर अपना दम तोड़ देती है।
moral –  कभी भी हमे बिना परिणाम का सोचे समझे किसी की बातो मे आकर अपना निश्चय किया गया काम नहीँ छोड़ना चाहिए कई बार लाइफ मेँ कई जगह ऐसे लोग मिलते हैँ जो हमेँ हमारे goal  से भटकाने की कोशिश  करेंगे पर हमेँ उनकी बातोँ मेँ नहीँ आना है। हमेशा पहले यह देखना है कि जिस चीज की यह मुझे सलाह दे रहा है।  उसे follow  करके क्या आज यह उस लाइन मेँ success है अगर success है तो पहले समझेँ और फिर उसे follow करेँ।  क्योंकि हमारे पास बिना मांगे सलाह देने वाले बहुत लोग होते हैँ और वह भी ऐसे लोग जो उस लाइन मेँ खुद success नहीँ है इस से related एक मूवी फैशन का डायलॉग मुझे याद आ गया जो बहुत अच्छा लगा
        ” ना जाने ज्यादातर success  की राय वही क्योँ देते हैँ जो खुद success  नहीँ है। “
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